श्री अ.भा.सा. जैन संघ द्वारा संचालित विभिन्न प्रवृतियों/आयामों के उतरोत्तर विकास हेतु संघ सदस्यों द्धारा प्रेषित सूचनाएं/शिकायत/समीक्षा केवल लिखित में ही मान्य होगी। मौखिक सूचना/शिकायत एवं समीक्षा की प्रति उत्तर की जवाबदेही नहीं होगी। कृपया भविष्य में मौखिक के बजाय लिखित रूप में WhatsApp 9602026899 अथवा ईमेल आईडी- helpdesk@sadhumargi.com अथवा Post से केन्द्रीय कार्यालय में भेजें। निश्चल जी कांकरिया, राष्ट्रीय महामंत्री, श्री अ.भा.सा.जैन संघ

साधुमार्गी पब्लिकेशन

संघ द्वारा जैन धर्म, दर्शन, आगम, कथा एवं प्रवचन से संबंधित साहित्य का प्रकाशन किया जाता है। अब तक 450 से अधिक साहित्य का प्रकाशन किया जा चुका है।

सम्मूर्च्छिम मनुष्य

मानव को आगम के अनुसार अपने जीवन को जीने के लिए अनमोल और दुर्लभ नियम व सिद्धांत बताए गए हैं। इस विषय की ओपन बुक परीक्षा आयोजित की जा रही है। इसमें प्रत्येक प्रतिभागी को ई-प्रमाण पत्र प्रदान किया जाएगा।

जिणधम्मो

आचार्य श्री नानेश की अमर कृति जिणधम्मो में आगम साहित्य के गूढ़ रहस्यों को संकलित किया गया है। पुस्तक में जैन धर्म का सार है। इसे जैन धर्म में पांचवा वेद कहा गया है। जिणधम्मों पुस्तक के ज्ञान का प्रचार-प्रसार करने के उद्देश्य से ओपन बुक परीक्षा का आयोजन किया जा रहा है। इसमें सभी उम्र के श्रावक-श्राविका भाग ले सकते हैं।

समता सेवा सोसायटी

विगत तीन दशकों से समता महिला सेवा केन्द्र, रतलाम के तत्वावधान में अनेक महिलाओं को रोजगार उपलब्ध करवाकर कई प्रकार के पापडों़ तथा भिन्न-भिन्न मसालों का उत्पादन किया जाता है। उत्पाद की गुणवत्ता क्रेताओं व ग्राहकों द्वारा मान्य है। महिलाओं को स्वावलम्बी व सम्मानपूर्वक जीवन जीने की उत्प्रेरणा की जाती है।

साधुमार्गी ग्लोबल कार्ड

यह एक यूनिक कार्ड होगा, जो आधार कार्ड की तरह ही साधुमार्गी सदस्यों के लिए उपयोगी साबित होगा।

इसके माध्यम से संघ की विभिन्न जन-उपयोगी गतिविधियों-योजनाओं में उपयोग किए जाने वाले अलग-अलग डेटाबेस का केन्द्रीकरण करने का कार्य किया जा रहा है। जिसमें संघ की सभी गतिविधियां डेटा बेस द्वारा संचालित की जा सके। इस प्रकार हमारा लक्ष्य प्रत्येक सदस्य की विभिन्न जानकारियां एक आई.डी नम्बर से जुड़ जाए। सदस्यगण अपनी एम.आई.डी. नम्बर देकर विभिन्न प्रवृत्तियों के बारे में संघ सम्बधी अपनी सभी जानकारी प्राप्त कर सकेंगे।

संघ द्वारा संचालित प्रवृत्तियां

श्री अ.भा.सा.जैन संघ के साथ महिला व युवा संघ के माध्यम से 30 से अधिक प्रवृत्तियों और आयामों पर देशभर में लोक कल्याणकारी कार्य किए जा रहे हैं। जिसमें धार्मिक, आध्यात्मिक व सामाजिक कार्य शामिल है। जैसे इदं न मम्, जीवदया, विहार सेवा, उच्च शिक्षा योजना, साहित्य व आगम साहित्य, सर्वधर्मी सहयोग, गुणशील, साधुमार्गी प्रोफेशन फॉर्म आदि प्रवृतियों व आयामों के माध्यम से जन सेवा का कार्य वृहद् स्तर पर किया जा रहा है।

संघ समर्पणा महोत्सव

प्रतिवर्ष संघ की स्थापना दिवस के रूप में आयोजित होने वाला संघ समर्पणा महोत्सव इस बार ब्यावर में सम्पन्न हुआ। जिसमें संघ की विभिन्न प्रवृत्तियों, गतिविधियों की प्रभावना की गई। ब्यावर अधिवेशन-2021 में नई कार्यसमिति का गठन किया गया। सभी ने मंच पर पद और गोपनीयता की शपथ ग्रहण की।

जैन धर्म के साधुमार्गी श्वेतांबर संप्रदाय की प्रतिनिधि संस्था है ‘श्री अखिल भारतवर्षीय साधुमार्गी जैन संघ।’ सन् 1962 में स्थापित इस संघ का उद्देश्य है सम्यक् ज्ञान, दर्शन और चारित्र के रास्ते राष्ट्र का उत्थान।
भगवान महावीर के अनुपम विरासत के अनुरूप अध्यात्म, शुद्ध संयम व सशक्त अनुशासन की पुनस्र्थापना के काम में लगे इस संघ के आध्यात्मिक मूल स्रोत भगवान महावीर के पाट परम्परा पर विराजमान आचार्य हैं। अभी इस पाट पर आचार्य श्री रामेश विराजमान हैं।
यह संघ देश भर में 350 से अधिक शाखाओं के माध्यम से धार्मिक एवं सामाजिक कार्यक्रमों में भागीदारी निभा रहा है। बिना रुके, बिना थके समाज एवं राष्ट्र के उत्थान में लगे संघ की शाखाएं अमेरिका, इंग्लैंड, नेपाल और भूटान समेत कई और देशों में भी है।
‘महिला समिति’ तथा ‘समता युवा संघ’ के रूप में अपनी दो भुजाओं की शक्ति के साथ संघ 35 से अधिक प्रकल्प संचालित कर रहा है। इनमें आध्यात्मिक, शैक्षणिक, जीव दया जैसे लोकोपकारी प्रकल्प लोगों का लगातार हित कर रहे हैं। सामाजिक कुरीतियों के उन्मूलन में भी संघ लगातार प्रयासरत है।

प्रवचन का सार

क्रिया का महत्व तब है जब क्रिया करने से दिल कोमल हो। यदि दिल कोमल नहीं हुआ तो कोई भी क्रिया काम नहीं आएगी। दिल चट्टान बना हुआ हो तो कितनी भी क्रिया करने से कुछ नहीं होगा। यतना करने में दिल गायब हो जाये तो वह दिल किसी काम का नहीं है। वह साधना किसी काम की नहीं है। दिल धड़कता हुआ रहना चाहिए। दिल प्रसन्न, कोमलता और करुण होना चाहिए। जैसे पहाड़ों से पानी झरता रहता है, वैसे ही हमारी कठोरता में भी करुणा का निर्जर झरना बहना चाहिए। करुणा का निर्झर झरना सूखना नहीं चाहिए। झरना सूख गया तो दिल काम आने वाला नहीं है। जिसका हृदय सूख गया वह हृदय नहीं, पत्थर है।

संघ साहित्य सूचि

प्रवचन
का सार

विहार
जानकारी

श्रमणोपासक

समाचार

मालवीय नगर जयपुर में हुई विशेष धर्म क्रियाएँ

जयपुर। शासन दीपिका श्री मनोरमा श्रीजी म.सा. आदि ठाणा 4 के सान्निध्य से मालवीय नगर जयपुर में विशेष धार्मिक क्रियाएँ लगातार चल रही हैं। नए-नए आयाम निरंतर चल रहे हैं। सितम्बर माह में ‘आचार विशुद्धि महोत्सव’ के तहत बहुत से श्रावक-श्राविकाएँ व युवा वर्ग ने अनेक प्रकार के प्रत्याख्यान ग्रहण किए तथा पर्युषण से पूर्व तीन दिन का शिविर ‘‘समवशरण का ठाठ सुबह 7 से 8’’ लगाया जिसमें भगवान महावीर के समवशरण की रचना का पूरा विवरण सचित्र बताया गया। इसमें लगभग 200 व्यक्तियरों ने नियमित समय से पूर्व आकर लाभ लिया जो चिरस्मण रहेगा। इसके बाद 30 अगस्त से 1 सितम्बर तक तीन दिवसीय विशेष शिविर ‘‘लक्ष्य की ओर अभिमुख एक रहस्यमय कथा’’ का अयोजन किया गया। लगभग 250 लोगों ने लाभ लिया तथा कर्म सिद्धांत को समझा। जैन सिद्धांत बत्तीसी की क्लास सुबह 6ः50 से 7ः50 तक लगातार म.सा. ने ली जिसमें लगभग 60 लोगों ने परीक्षा दी।

समता युवा संघ

समता युवा संघ का प्रवास कार्यक्रम ब्यावर मे सम्पन्न प्रवास कार्यक्रम सम्पन्न के बाद तपस्वी चंद्रकांता जी के घर जाकर की करी अनुमोदना ब्यावर। श्री अखिल भारतवर्षीय साधुमार्गी जैन समता युवा संघ के जयपुर-ब्यावर अंचल के ऊर्जावान राष्ट्रीय उपाध्यक्ष श्री सुमित बम्ब-जयपुर के नेतृत्व में एवं राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री अतुल पगारिया-जावरा राष्ट्रीय महामंत्री श्री दीपक मोगरा-उदयपुर एवं राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष श्री सुमित बोथरा-रायपुर की विशेष उपस्थिति में राष्ट्रीय एवं जयपुर-ब्यावर अंचल की समस्त आंचलिक कार्यकारिणी का एक-दिवसीय प्रवास सम्पन्न हुआ।

युवा साथियो के लिये सात दिवसीय ज्ञान-ध्यान शिविर

भीम। पर्याय ज्येष्ठ श्री प्राणेश मुनि जी म.सा., पर्याय ज्येष्ठ श्री उम्मेद मुनि जी म.सा., शासन दीपक श्री जयप्रभ जी म.सा., श्री यत्नेश मुनि जी म.सा. आदि ठाणा 4 की असीम अनुकम्पा ओर प्रेरणा से भीम के समस्त जैन परिवार के युवा साथियों के लिये दिनांक 15 सितम्बर से 22 सितम्बर तक सुबह 6.45 बजे से 7.45 बजे तक भीम जैन स्थानक भवन में 7 दिवसीय ज्ञान-ध्यान शिविर का आयोजन किया गया। सभी युवा साथियों के लिये रोजाना शिविर के बाद अल्पाहार की व्यवस्था श्री संघ द्वारा रखी गई।
ज्ञान-घ्यान सीखने से अपने कर्मों की निर्जरा होती है। पाप कर्म टूटते हैं। शिविर का विषय ‘‘कर्म बन्ध हमारा जीवन’’ था।

‘‘ए वन इलेवन’’ एकासन तप

परम पूज्य आचार्य गवन 1008 श्री रामलाल जी म.सा. द्वारा प्रदा आयाम ‘‘ए वन इलेवन’’ एकासन तप के आह्वान के अंतर्गत मेवाड़ अंचल में 70 एकासन हुए। कहते हैं महापुरुष का चिंतन, उनका इशारा श्रावक का मार्ग बदल देता है। ऐसा ही आह्वान आचार्य भगवन् ने ब्यावर में किया। इसमें साधुमार्गी जैन संघ, समता युवा संघ, समता महिला मंडल, समता बहुमंडल, बालक-बालिका मंडल सहित सभी ने विशेष सहय¨ग प्रदान किया।
श्री साधुमार्गी जैन समता युवा संघ, टीम द्वारा महिलाओ के लिए दिनांक 22 सितम्बर से 5 अक्टूबर तक सात दिवसीय शिविर दोपहर 2 से 3ः30 तक जैन स्थानक भवन, में आयोजित किया गया जिसका विषय कर्म बन्ध हमारा जीवन और साधु साध्वियो के गोचरी का विवेक कैसे रखें’’ था।

विहार जानकारी

02-12-2021

आदि ठाणा-6 रात्रिविश्राम हेतु
विराजित @स्थान- तिलोक दास जी वैष्णव का निवास,
पिपलाज,जिला-अजमेर (राज.)

श्रावक! तू पूरे विश्व का विरल है. तु विशेष है तू

– आचार्य श्री रामेश

सत्ता प्राप्ती के बाद सावधानी की जरूरत है .

– आचार्य श्री रामेश

जैसे पड़े हुए लोहे के जंग लग जाता है वैसे ही निकम्मे अवयव भी अपनी शक्ति खो बैठते हैं

– आचार्य श्री रामेश

जब लोग दुःख से भागने की कोशिश करते हैं तब दुःख उनका पीछा करता है, लेकिन जो दुःख का सामना करने को तैयार हो जाता है तो दुःख दुबक जाता है

– आचार्य श्री रामेश

सत्ता प्राप्ति के बाद अपनी सात्विकता को गुम नहीं होने देना चाहिए

– आचार्य श्री रामेश

एक छोटा सा दिखने वाला त्याग भी जीवन में बड़ा चमत्कारिक हो सकता है

– आचार्य श्री रामेश

दुनिया के सुधरने का इन्तजार वह करता है, जो अपना सुधार नहीं कर पाता

– आचार्य श्री रामेश

साधक को थकना नहीं चाहिए

– आचार्य श्री रामेश

सत्ता के लिए सत्व का होना जरूरी है

– आचार्य श्री रामेश

ज्ञान के लिए उद्यम होना चाहिए

– आचार्य श्री रामेश

अनुकूल-प्रतिकूल परिस्थितियाँ हमें बल देने वाली होती है।

– आचार्य श्री रामेश

जीना हमें है कैसे जिएं, यह निर्णय भी हमें ही करना है

– आचार्य श्री रामेश

भावना जब प्रबलता का रूप लेती है तो वह स्वतः रास्ता भी खोज लेती है

– आचार्य श्री रामेश

अपने मन को व्यक्ति स्वयं जान सकता है, उतना अन्य कौन जान पाएगा

– आचार्य श्री रामेश

मन की गति सदा एक ही नहीं रहती है। वह बलदती रहती है

– आचार्य श्री रामेश

मन को साधना कठिन अवश्य है पर असंभव नहीं

– आचार्य श्री रामेश

गृह त्यागी होना ही अणगारत्व नहीं है। अणगार के लिए संयोगों का त्याग होना जरूरी है

– आचार्य श्री रामेश

जब लोग दुःख से भागने की कोशिश करते हैं तब दुःख उनका पीछा करता है, लेकिन जो दुःख का सामना करने को तैयार हो जाता हैं तो दुःख दुबक जाता है

– आचार्य श्री रामेश

धर्म को यदि जीया जाता है तो कोई कारण नहीं कि उससे जीवन में बदलाव न आए

– आचार्य श्री रामेश

सर्जन के लिए सकारात्मक ऊर्जा की अपेक्षा होती है, वह धर्म से प्राप्त होती है

– आचार्य श्री रामेश

अहं संसार में अटकाएगा। वह भव से पार नहीं होने देगा

– आचार्य श्री रामेश

कपट क्रिया बिना दांव-पेच के सफल नहीं हो पाती। दांव पेच कई बार दूसरों को फांसने में कामयाब हो जाते हैं, किन्तु अन्तवोगत्वा दांव-पेच करने वाला स्वयं उसमें फस जाया करता है

– आचार्य श्री रामेश

धर्म की पहचान हो जाने पर वह सहसा किसी को नहीं ठग सकता

– आचार्य श्री रामेश

धन की तरफ लगा व्यक्ति मान सम्मान की लालसा रखता है किन्तु धर्म की तरफ लगा व्यक्ति इनकी परवाह नहीं करता है

– आचार्य श्री रामेश

श्री गौतम जी जैन

अध्यक्ष , श्री अ.भा.सा. जैन संघ

श्री निश्चल जी कांकरिया

महामंत्री , श्री अ.भा.सा. जैन संघ

श्री मनोज जी डागा

कोषाध्यक्ष , श्री अ.भा.सा. जैन संघ

श्री प्रतीक जी सूर्या

सह कोषाध्यक्ष , श्री अ.भा.सा. जैन संघ