जैन धर्म के साधुमार्गी श्वेतांबर संप्रदाय की प्रतिनिधि संस्था है ‘श्री
अखिल भारतवर्षीय साधुमार्गी जैन संघ’। सन् 1962 में स्थापित इस संघ का
उद्देश्य है सम्यक ज्ञान, दर्शन और चारित्र के रास्ते राष्ट्र का
उत्थान।
भगवान महावीर के अनुपम विरासत के अनुसार अध्यात्म, तत्त्व ज्ञान व
शास्त्र अध्ययन की पुनर्स्थापना के काम में लगे इस संघ के आधारभूत मूल
स्रोत भगवान महावीर के पाट परंपरा पर विराजमान आचार्य हैं। अभी इस पाट
पर आचार्य श्री रामलाल विराजमान हैं।
यह संस्था भारत ही नहीं, विदेशों में रह रहे श्रावक-श्राविकाओं के
माध्यम से धर्म की गंगा को जन-जन तक पहुँचाने का कार्य कर रही है। भारत
के अलावा यह संस्था अमेरिका, इंग्लैंड, नेपाल और भूटान सहित कई और
देशों में सक्रिय है।
पहले चरण में संघ का मूल मंत्र रहा है कि "धर्म की बुनियाद मजबूत हो और
अधिक-से-अधिक युवाओं को इससे जोड़ा जाए।" इस दिशा में धर्मशालाओं,
पाठशालाओं और लोकोपयोगी कार्यक्रमों द्वारा निरंतर कार्य किया जा रहा
है।
।।जय जिनेन्द्र ~ जय महावीर।। ।।जय गुरू नाना ~ जय गुरु राम।। 🌄हुक्म संघ के नवम पट्टधर, जन-जन की आस्थाओं के केंद्र, उत्क्रांति प्रदाता, युग निर्माता, आगमज्ञाता परम पूज्य आचार्य भगवन 1008 श्री रामलालजी म.सा. बेले-बेले के तपस्वी, बहुश्रुत वाचनाचार्य उपाध्याय प्रवर श्रद्धेय श्री राजेश मुनि जी म.सा. आदि ठाणा समता भवन, पोस्ट ऑफिस के सामने, उदासर, जिला- बीकानेर (राज.) सुख साता पूर्वक विराज रहे है।
अध्यक्ष
महामंत्री
कोषाध्यक्ष
सह कोषाध्यक्ष