ज्ञानार्जन

स्वाध्याय

तप-त्याग

व्रत-विवेक

संस्कार

जन जन में राम

संघ विस्तार व सशक्तिकरण

सामाजिक

गुदड़ी के लाल

ज्ञानार्जन

परम पूज्य आचार्य भगवन का हमेशा से चिंतन रहा है कि प्रत्येक साधुमार्गी ज्ञानवान एवं क्रियावान बने। इस हेतु समय-समय पर भगवन विभिन्न आयाम भी प्रदान करते रहते हैं। इसी कड़ी में संघ ज्ञानार्जन प्रकल्प लेकर प्रस्तुत हुआ है। इसके अंतर्गत 8 बिन्दुओं को समाहित किया गया है ।

श्रुत आरोहक

श्रुत की आराधना करके श्रुत आरोहक बनाना। आगम, थोकड़े, कर्म, सामान्य ज्ञान आदि विषयों से सुसज्जित  इस ज्ञानवर्द्धक कोर्स में  सभी उम्र के श्रावक- श्राविकाएं भाग लेकर अपने ज्ञान में अभिवृद्धि कर सकते हैं।
लक्ष्य-1000- श्रावक-श्राविकाएं

कर्म तत्वज्ञ

6 कर्म ग्रंथ ‘ तक के ज्ञान को  समाहित किए हुए कर्म प्रज्ञप्ति पर आधारित यह कोर्स प्रारंभ किया गया है। इसमें विषय का गहनता से अध्ययन कराया जाएगा ताकि विद्यार्थी स्वयं ज्ञा्न अर्जित कर सके और अन्य को वितरित करने में सक्षम बन सके।यह कोर्स सिर्फ श्रावक वर्ग (पुरुष ) के लिए है।

The Karma Quiz

‘कर्म खपाओ-सिद्धत्व पाओ’ 6 कर्म ग्रंथ तक के ज्ञान को समाहित किए हए ग्रंथ ‘ कर्म प्रज्ञप्ति ’ पर आधारित  यह आफलाईन  क्विज काम्पीटिशन रहेगा। जिसमें स्थानीय से अंचल व राष्ट्रीय स्तर पर क्विज काम्पीटिशन आयोजित किए जाएंगे।
लक्ष्यः सभी

ओपन बुक प्रतियोगिता

महत्तम महोत्सव के दौरान तीन चातुर्मास काल हमारे समक्ष प्रस्तुत होंगे्।

1. 2022- श्रीमद् अन्तगडदसाओ ( अन्तकृद्दशांक सूत्र)
2. 2023- जिणधम्मो- श्रावक धर्म/ साधु धर्म
3.. 2024- श्री मद देशवैकालिकः 4 अध्ययन-अर्थ

इन तीन वर्ष में चातुर्मास काल के दौरान एक-एक महत्वपूर्ण व ज्ञावर्द्धक विषय पर ओपन बुक आफलाइन प्रतियोगिता आयोजित करना है जिसके माध्यम से सामान्य श्रावक- श्राविकाएं भी अपने ज्ञान में अभिवृद्धि कर सकें।
लक्ष्यः सभी

20 थोकड़ों का अध्ययन

20 महत्वपूर्ण आगम सम्मत थोकड़ों का अध्ययन करवाना, उस पर विभिन्न परीक्षाओं का आयोजन करना ताकि श्रावक- श्राविका वर्ग थोकड़ों के ज्ञान से अपने जीवन को उत्कृष्ट बना सकें।
लक्ष्यः1000 श्रावक- श्राविकाएं।

प्रतिक्रमण कंठस्थ विधि सहित ( 18 से 45 वर्ष )

आज का युवा कल का भविष्य है और जब युवा ज्ञान को क्रियात्मकता के साथ अपने जीवन में उतारेगा तभी संघ का विकास होगा। प्रतिक्रमण कंठस्थ करना व साथ में विधि पूर्वक उसे क्रियात्मक रूप में करना भी आना।
लक्ष्य- 500 युवा श्रावक ( जिनको पूर्व में प्रतिक्रमण नहीं आता हो- सिर्फ नए )

आगम के अर्थ का स्वाध्याय ( श्रुत रमण )

तीर्थंकर भगवंतों की वाणी, उनके वचन, उनकी देशना हमारे आगम हमारे लिए पथ प्रदर्शक हैं। आगमों के अर्थ का स्वाध्याय कर हम अपनी आत्मा को निर्मल व हल्का बना सकते हैं।
चातुर्मास 2022 में अग्रलखित – आगमों का स्वाध्याय करने का लक्ष्य रख सकते हैं।
श्रीमद उपांसकदशांक सूत्र, श्रीमद् अन्तगडदशाओ सूत्र, श्रीमद् उत्तराध्ययन सूत्र, श्रीमद् अनुतरोववाईस सूत्र, श्रीमद् स्थानांग सूत्र, श्रीमद् राजप्रश्नीय सूत्र।
लक्ष्यः 50 श्रावक-श्राविकाएं।

जैन धर्म की विभिन्न विधाओं के शिक्षक तैयार करना

विभिन्न पाठशाला, शिविरों एवं अन्य ज्ञान का ज्ञानार्जन करवाने में सक्षम ज्ञान सेवार्थियों को प्रशिक्षण देकर तैयार करना, उन्हें विभिन्न .विधाओं जैसे-थोकड़े, स्वाध्याय, कर्म सिद्धांत, प्राकृत, संस्कृत आदि में पारंगत करना व धर्म व ज्ञान का फैलाव करना।
लक्ष्यः-शिक्षक सेवार्थी तैयार करना

स्वाध्याय

हर भवि आत्मा के जीवन का अभिन्न अंग होना चहिए- स्वाध्याय। कर्म निर्झरा का सर्वश्रेष्ठ माध्यम होता है – स्वाध्याय। मन, वचन,  काया को साधने का  मार्ग होता है – स्वाध्याय। इसीलिए महत्तम महोत्सव के अन्तर्गत संघ स्वाध्याय प्रकल्प पर विशेष प्रभावना करना चाहता है। इस प्रकल्प के अंतर्गत कुछ बिन्दुओं को समाहित किया गया है।

आचार्य भगवन के प्रवचन,/ चिंतन की पुस्तकें पढ़ना

परमागम रहस्य ज्ञाता, परम पूज्य आचार्य भगवन की निर्मल प्रज्ञा से निकले वचन व चिंतन के संकलन पर आधारित विभिन्न पुस्तकों  को अन्तर्हृदय की गहराईयों से पढ़ना, साथ में  परीक्षा द्वारा  मूल्यांकन करना।
Eye To I, No Short cut Please, आरोह, भ्रामरी,ब्रह्माक्षर, अनाहत नाद, नीरव का रव, उपांशु आदि।
लक्ष्यः 5000 श्रावक-श्राविकाएं

महापुरुषों के जीवन परिचय को पढ़ना

हुक्म संघ के दैदीप्यमान नक्षत्र हमारे 8 पूर्वाचार्य प्रवर एवं वर्तमान आचार्य भगवन यानी इन 9 महापुरुषों की जीवन यात्रा- संयम यात्रा को जीवन परिचय के रूप में पढ़ना व उससे प्रेरणा लेकर स्वयं के जीवन को संवारना।
लक्ष्यः 5000 ( श्रावक-श्राविकाएं )

आध्यात्मिक आरोग्यम

पूज्य आचार्य भगवन द्वारा ज्ञान पंचमी पर  आध्यात्मिक आरोग्यम’ रूपी अनुपम सौगात प्रदत्त की गई थी। इसके अंतर्गत सभी दिए गए  9 बिन्दु व्यक्ति के जीवन में  आमूलचूल परिवर्तन लाने में समर्थ हैं। अतः साधुमार्गी संघ में प्रत्येक सदस्य को इन 9 बिन्दुओं से जोड़ते हुए प्रत्येक संघ  में ‘ आध्यात्मिक आरोग्यम ग्रुप ‘का निर्माण करना है।
लक्ष्यः प्रत्येक संघ में  ‘ आध्यात्मिक आरोग्यम’ के विश्वस्तरीय ग्रुप का निर्माण करना।

बिन्दु
  1. गुणमय  दृष्टि का विकास
  2. छिद्रान्वेषण का लक्ष्य नहीं।
  3. इन्द्रिय निग्रह का लक्ष्य।
  4. आत्मानुशासन  का विकास।
  5. विवाद- विग्रह से पराड्गमुखता
  6. मैत्री भाव का विकास।
  7. जीवन नियमन।
  8. सामूहिक स्वाध्याय साधना
  9. तत्वनुप्रेक्षा ( आत्मचिंतन )
श्रीमद दशवैकालिक सूत्र के चार अध्ययन कंठस्थ

समस्त आगमों का सार श्रीमद् दशवैकालिक सूत्र है जो हमें सद् मार्ग की ओर, विरक्ति की ओर बढ़ने को प्रेरित करता है। इसके 4 अध्ययन कंठस्थ करना।
लक्ष्य- 500 ( श्रावक-श्राविकाएं )।

प्रतिदिन 100 गाथाओं का स्वाध्याय करना

दो वर्ष ( 23- 25 तक ) प्रतिदिन 100 गाथाओं का स्वाध्याय करना।
लक्ष्यः 2500 ( श्रावक- श्राविकाएं )।
उप विभाग प्रमुखः- श्री विमल कांकरिया, बेंगलुरू

तप-त्याग

प्रत्येक श्रावक को तप त्याग से जुड़ना चाहिए, श्रावक जीवन के लिए यह महत्वपूर्ण है। काया को साधना हो, कर्मों को खपाना हो या भव- भवांतर को सीमित करना हो, बिना तप यह संभव नहीं है। संघ के इस प्रकल्प से आइये आप और हम सभी जुड़ें एवं औरों को भी जोड़ें ।

तपस्या की लड़ी

साधुमार्गी संघ के संगठनात्मक- 12 अंचल हैं। इन संभी अंचलों में अलग- अलग माघ सुदी 12 संवत् 2080 से माघ सुदी 12 संवत् 2081 तक एक वर्ष अनवरत एकासन/ आयम्बिल/ उपवास/तेला की लड़ी चलेः प्रतिदिन इन चारों व्रतों के प्रत्याख्यान होने चाहिए।
लक्ष्यः प्रतिदिन – 12 अंचल में अलग- अलग 1 एकासन, 1 आयम्बिल, 1 उपवास, 1 तेला के प्रत्याख्यान कम से कम होने चाहिए।

पूर्ण संवर/ पूर्ण दया/ पौषध की आराधना

स्वंय को सावद्य क्रियाओं से दूर रखने का श्रेष्ठ माध्यम  है संवर/ दया या पौषध, आत्मा के निकट होना, स्वयं में स्थिर होना।

  1. सूर्यास्त से सूर्योंदय तक संवर
  2. पूर्ण अर्थात 24 घंटे वाली दया
  3. चार प्रहर, पांच प्रहरया अष्ट प्रहरी पौषध

इन तीनों को मिलाकर या तीनों में से  कोई एक-महत्तम महोत्सव की अवधि में 50 दिन करना।

लक्ष्यः 3000 श्रावक/ श्राविकाएं

दो वर्ष निरंतर वर्षीतप ( एकान्तर )

माघ सुदी 12 वि. सं.2079 से माघ सुदी 12 वि. सं. 2081 तक निरंतर दो वर्ष तक उपवास का एकान्तर करना ।
लक्ष्यः 200 श्रावक- श्राविकाएं

चार घंटे प्रतिदिन मौन आराधना

महत्तम महोत्सव की अवधि या कम से कम इन दो वर्ष तक ( माघ सुदी 12 वि.सं.2079 से माघ सुदी 12 वि.सं. 2081) प्रतिदिन 1 घंटा मौन रहना। यह नियम प्रतिदिन शयन ( सोने के समय ) के अतिरिक्त रहे।
लक्ष्यः 5000 श्रावक- श्राविकाएं

प्रतिदिन एक विगह का त्याग

महत्तम महोत्सव की अवधि या कम से कम इन दो वर्ष तक ( माघ सुदी 12 वि.सं.2079 से माघ सुदी 12 वि.सं. 2081) प्रतिदिन 1 घंटा मौन रहना। यह नियम प्रतिदिन शयन ( सोने के समय ) के अतिरिक्त रहे।
लक्ष्यः 5000 श्रावक- श्राविकाएं

माह के चार दिवस चौविहार प्रत्याख्यान

प्रतिमाह चार दिन–सूर्यास्त पश्चात किसी भी प्रकार का अन्न-जल आदि ग्रहण नहीं करना, अगले दिन प्रातः नवकारसी पश्चात ही अन्न- जल ग्रहण करना।
लक्ष्यः 5000 श्रावक- श्राविकाएं।
अवधिः- 2 वर्ष ( माघ सुदी 12 संवत् 2079 से माघ सुदी 12 संवत् 2081 तक )

व्रत-विवेक

हम हमारे जीवन में अनेक प्रकार के व्रतों को अंगीकार करते हैं। उनकी उत्कृष्ट पालना करना हमेंशा हमारा लक्ष्य होना चाहिए एवं उनमें किसी प्रकार का दोष ना लगे, यह विवेक हमें हमेशा रखना चाहिए। एक श्रावक की साधना को और उत्कृष्ट करने के लिए व्रत-विवेक के कुछ बिन्दुः

श्रावक के 12 व्रतों में प्रत्येक पर एक- एक क्रियात्मक संकल्प का पालन

श्रावक के 12 व्रतों में प्रत्येक पर एक- एक ऐसा सरल व महत्वपूर्ण क्रियात्मक संकल्प को अपने जीवन में धारण करना व व्रतधारी श्रावक के रूप में स्वयं के जीवन को संवारना।
लक्ष्यः 5000 श्रावक- श्राविकाएं संकल्पों को आजीवन ग्रहण करें।

सेल की घड़ी के विकल्प का उपयोग करना

हमारी सारी धार्मिक गतिविधियां निर्वद्य रूप से हो, इस हेतु सेल की घड़ी का विकल्प संघ आसानी से उपलब्ध करवाएगा, आप इन्हें अपने जीवन में अपनाएं व धार्मिक क्रियाओं को निर्वद्य रूप से संपन्न करें।
लक्ष्यः सभी

ये 5 प्रत्याख्यान आजीवन हेतु ग्रहण करें

संयमशील आत्मा के संयम जीवन में हम सहयोगी बनें व हमारा कर्म भी संयमी आत्मा को दोष लगाने वाला ना हो। इस हेतु हम सभी को ये पांच प्रत्याख्यान आजीवन ग्रहण करने चाहिएः-
1. म.सा. को पधारते देखकर घर के अंदर सूचना नहीं करूंगा।
2. म.सा. को पधारते देखकर गैस बंद नहीं करूंगा।
3. स्थानाक भवन के अन्दर म.सा. को गोचरी के भाव नहीं भाऊंगा।
4. भोजन करते समय स्वंय का मोबाइल से स्पर्श नहीं रखूंगा।
5. घर असूझता होने पर किसी पर क्रोध नहीं करूंगा।
लक्ष्यः 10000 श्रावक-श्राविकाएं ये 5 प्रत्याख्यान ग्रहण करें।

संस्कार ( 18 वर्ष से कम उम्र के बच्चों हेतु )

बच्चे कच्ची मिट्टी के समान होते हैं और हम उन्हें जैसा ढालते हैं , वे वैसे ही ढल जाते हैं। आज उनमें संस्कारों का बीजारोपण करेंगे तो कल उज्जवल धर्ममय भविष्य हमें देखने को मिलेगा। यही चिंतन लेकर संघ महत्तम महोत्सव में संस्कार रूपी यह प्रकल्प लेकर प्रस्तुत हुआ है। इसके मुख्य बिन्दुः

’अब कर कमाल ’

खेलते- कूदते हुए धर्म सीखना। मौज- मस्ती के माहौल में बच्चे ज्ञानार्जन कर ले तो इससे अच्छा भला क्या हो सकता है। प्रति छह माह में अर्थात् कुल अवधि में 5 बार ऐसी बड़ी गतिविधियां पूरे राष्ट्र में एक साथ आयोजित करना।
लक्ष्यः सकल जैन समाज के बच्चे।

सामायिक कंठस्थ ( विधि सहित )

सभी सावद्य क्रियाओं से दूर होकर स्वयं में सम हो होना सामायिक है। हमारे जैन धर्म का मूल पाठ है सामायिक। यह प्रत्येक जैन परिवार के बच्चों को आना ही चाहिए।
लक्ष्यः 5000 बच्चे ( जिनको पहले से सामायिक नहीं आती हो अर्थात सिर्फ नए )

प्रतिक्रमण कंठस्थ ( विधि सहित )

सांसारिक जीवन में रहते हुए हम प्रतिदिन जाने -अनजाने में अनेक दोषों को अपने साथ लगा लेते हैं। उन दोषों को उसी दिन या पाक्षिक रूप से स्वयं की आत्मा से छुड़ाना, उसके लिए क्षमा मांगना प्रतिक्रमण कहलाता है।यह हमारी आत्मा को हल्का करता है । बच्चों को विधि सहित प्रतिक्रमण कंठस्थ करवाना।
लक्ष्यः1000 बच्चे ( जिनको पहले से प्रतिक्रमण नहीं आता हो अर्थात् नए )

समता संस्कार पाठशाला

धार्मिक संस्कारों की नींव है पाठशाला। साधुमार्गी संघ की समता संस्कार पाठशालाएं पूरे राष्ट्र में फैली हुई हैं। इनके माध्यम से हजारों बच्चों का ज्ञानार्जन व संस्कार संवर्द्धन हो रहा है। महत्तम महोत्सव में इन पाठशालाओं का विस्तार करने का लक्ष्य रखा गया है।
लक्ष्यः नए क्षेत्रों में पाठशालाएं खोलना
उप- विभाग प्रमुखः- सुषमा बरड़िया, रायपुर

JSP

बच्चों की व्यावहारिक शिक्षा के साथ – साथ धार्मिक व संस्कार शिक्षा भी निरंतर चलती रहे इस हेतु जैन संस्कार पाठ्यक्रम( जेएसपी ) निरंतर गतिमान है। आज राष्ट्र के अनेक केन्द्रों पर हजारों विद्यार्थी इस कोर्स से जुड़कर झानार्जन कर रहे हैं। महत्तम महोत्सव में इन जेएसपी केन्द्रों के विस्तार का लक्ष्य रखा गया है।
लक्ष्यः नए केन्द्र व नए विद्यार्थियों को जोड़ना

समता संस्कार शिविर का आयोजन

जो बच्चे निरंतर पाठशाला नहीं जा पाते हों या जेएसपी से नहीं जुड़ पाते हैं उन बच्चों में धामिर्कता का विकास करने एवं सभी बच्चों में लक्ष्य विशेष को लेकर प्रशिक्षण, अध्यापन आदि कार्यों को करवाना व उनके व्यक्तित्व का विकास करना आदि कार्यों हेतु महोत्सव की अवधि में 12 आंचल में आंचलिक स्तर पर 5-5 शिविर आयोजित करना।

सकारात्मक संस्कार प्रभावना

कोई भी 5 अच्छे कार्य जो बच्चे स्वयं करें व 5 अन्य को भी करने के लिए प्रेरित करें।
लक्ष्यः कम से कम 500 बच्चे जो सभी 5 प्रभावनाओं में भाग लेवें।

संघ के प्रति अहोभाव में वृद्धि हेतु पाठ्यक्रम

चतुर्विध संघ की सेवाओं से जीवों को क्या लाभ ’ विषय पर एक पुस्तक का संकलन व प्रकाशन करना  व उसे समता संस्कार पाठशाला व Know and Grow के पाठ्यक्रम में समाहित कर बच्चों में संघ के प्रति अहोभाव में वृद्धि करना।

महत्तम ओलंपियाड

सकल जैन समाज के ऐसे बच्चे जो डिजीटल प्लेटफार्म का निरंतर उपयोग करते हैं व स्थानक भवन व चारित्र आत्माओं का संयोग कम ले पाते हैं । उन्हें धर्म से जोड़ने हेतु व जैन धर्म की बुनियादी जानकारी, शिक्षा व ज्ञान प्रदान करने हेतु दो आयु वर्गों में महत्तम ओलंपियाड का आयोजन करना।
आयुवर्ग 1. 10 से 18 वर्ष
2. 19 से 25 वर्ष

जन जन में राम

युग निर्माता, व्यसन मुक्ति के प्रणेता, उत्क्रांति प्रदाता, गुणशील संप्ररेक, महान अध्यात्म योगी, परम पूज्य आचार्य भगवन 1008 श्री रामलाल जी म.सा. जैसे युग पुरुष कई सदियों में इस धरा पर अवतरित होते हैं। उनके जीवन का हर पल, हर क्रिया एक चलते – फिरते आगम – सम प्रतीत होती है। आपका चिंतन, आपकी प्रेरणा, आपकी देशना, भवि आत्माओं के जन- जन के भव कल्याण, जीवन कल्याण की भावनाओं से ओतप्रोत होती है। ऐसे आगम दृष्टा के जीवन को प्रत्येक प्राणी मात्र तक पहुंचाना, जन जन तक पहुंचाना है। पूरा देश, पूरा राष्ट्र राममय हो जाए ऐसा प्रयास होना चाहिए। इस हेतु कुछ बिन्दुः-

ग्रंथ/ विशेषांक

हम सभी की आस्था के केन्द्र बिन्दु, परम पूज्य आचार्य भगवन के पूरे जीवन को शब्दों में उतारना, उनके बाल्यकाल, युवा अवस्था, वैरायग्य काल, दीक्षा, मुनि जीवन, मुनिप्रवर, युवाचार्य से लेकर आचार्य पद व आचार्य पद प्राप्ति के पश्चात संघ विकास एवं भवी जीवों के उत्थान हेतु लिए गए निर्णय व पुरुषार्थ को शब्दों में उतारते हुए आचार्य भगवन के 50 वर्षों के संयम जीवन एवं सम्पूर्ण जीवन पर आधारित एक अनमोल ,अद्भुत ग्रंथ की रचना करना।
लक्ष्यः इतिहास निर्माता युग पुरुष के जीवन से आने वाली अनेक पीढ़ियों को अवगत करवाना।

जन जन में राम

दिव्य चारित्र पुरुष, पूज्य आचार्य भगवन के जीवन पर रचित होने वाले ग्रंथ के आधार पर देश के विभिन्न भौगोलिक दृष्टि से महत्वपूर्ण 50 शहरों में कार्यक्रम/ सेमिनार/ आदि का वृहद स्तर पर आयोजन करना। उच्च कोटि के विद्वान चिंतकों के व्याख्यान/ सेमिनार आयोजित करना व अन्य बड़े सामाजिक कार्य साथ में करना ताकि गुरु राम के चिंतन को जन-जन तक पहुंचाया जा सके।
लक्ष्यः जन-जन में गुरु राम के चिंतनों को पहुंचाना।

वैराग्य का प्रस्फुटन

परम पूज्य आचार्य भगवन ने अनेकानेक भवि आत्माओं को तारने की प्रेरणा दी और दे रहे हैं। ऐसे बहुत विरले वीर होते हैं जो संयम की राह पर चलकर अपना जीवन तार लेते हैं। प्रत्येक संयमशील आत्मा के जीवन में ऐसी कोई घटना या बिन्दु लगभग होता है , जो उनके मन में वैराग्य की ज्योति प्रज्जवलित कर देता है। हम ऐसे ही बिन्दुओं व घटनाओं को संकलित करके एक पुस्तक का प्रकाशन करने जा रहे हैं। यह पुस्तक निश्चित रूप से और अनेक भवि आत्माओं को संयम की राह पर चलने के लिए प्रेरित करेगी।
लक्ष्यः भवि आत्माओं के जीवन के चरम लक्ष्य की ओर बढ़ने की प्रेरणादायक पुस्तक की रचना।

संघ विस्तार व सशक्तिकरण

संघ हमारा अविचल, मंगल, नंदन वन सा महक रहा।
हम सब इसके फूल व कलियां, सुंदरत्तम निज संघ अहा॥
साधुमार्गी संघ आज एक नंदन वन की तरह महक रहा है। इसका विस्तार दिनों-दिन नए- नए क्षेत्रों में होता जा रहा है। आज साधुमार्गी संघ देश ही नहीं, विदेशों तक अपना परचम लहरा रहा है। आज इस महत्तम महोत्सव के माध्यम से हम भी संघ विकास में अपना योगदान दें व संघ विस्तार व सशक्तिकरण में सभी सहभागी बनें।

साधुमार्गी संघ विस्तार का लक्ष्य।
महिला समिति विस्तार का लक्ष्य
समता युवा संघ विस्तार का लक्ष्य

हमारे संघ की तीनों ईकाइयां पूरे राष्ट्र के साथ विदेशों में फैली हैं। फिर भी अभी अनेक क्षेत्रों में और अधिक शाखाएं खुलने की संभावनाएं हैं। हम उन संभावनाओं को तलाशकर वहां नवीन संघ/ शाखा का गठन करेंगे।

युवा शाखाएं खोलना

ऐसे क्षेत्र जहां परिवार कम हैं या युवा कम हैं जिसके कारण वहां
समता युवा संघ का गठन नहीं हो पा रहा हैं वहां युवा शाखा खोलेंगे ताकि वहां के युवाओं को भी
संघ की मुख्य धारा में जोड़ते हुए युवा शाखा का गठन करके उनको संघ सेवा में आगे लाया जा
सकता है।
लक्ष्यः नई युवा शाखाएं खोलना

अंतरराष्ट्रीय संघ/ प्रतिनिधि

आज साधुमार्गी संघ के संघ व प्रतिनिधि अनेक देशों में फैले हुए हैं जिनका और अधिक विस्तार करना है ताकि आचार्य भगवन के चिंतनों को हम वहां तक पहुंचाकर भवि जीवों के जीवन का उत्थान करने में सहायक बन सकें।
लक्ष्यः नए देशों/ क्षेत्रों में साधुमार्गी संघ/ प्रतिनिधि स्थापित करना।

पूरे राष्ट्र में फैले हमारे प्रत्येक साधुमार्गी संघ की प्रत्येक शाखा में एक चिकित्सा सेवा समिति, एक विहार सेवा समिति, एवं एक उत्क्रांति समिति का अनिवार्यतः गठन करना व उन समितियों के सदस्यों को स्थानीय से अंचल, अंचल से राष्ट्रीय स्तर पर चैनल बनाकर जोड़ना और साथ ही उन्हें संघ की रीति- नीति- मर्यादाओं के साथ इन समितियों में कैसे कार्य करना है, उसका प्रशिक्षण देना व समयानुसार व आवश्यकता होने पर उनको राष्ट्रीय स्तर से हर तरह की सहायता उपलब्ध करवाना।

विहार चैनल
मेडिकल चैनल
उत्क्रांति सलाहकार समिति

सामाजिक

साधुमार्गी संघ एक धार्मिक संघ है, लेकिन साथ ही हम समय-समय पर अपनी सामाजिक जिम्मेदारियों को भी बखूबी निभाते रहते हैं। इसी कड़ी में महत्तम महोत्सव के अंतर्गत सामाजिक सेवा के बिन्दुओं का भी समावेश किया गया है।
मुख्य बिन्दुः-

B 2 B नेटवर्किंग माडल ( App)

साधुमार्गी संघ एक परिवार है और हमारे इस परिवार के
प्रत्येक सदस्य की आवश्यकताओं का ध्यान रखने का भी हम प्रयास करते हैं। इसी कड़ी में एक
बिजनेस नेटवर्किंग बनाने जा रहे हैं जिसके माध्यम से साधुमार्गी परिवारों की बिजनेस व नौकरी
संबंधी सभी आवश्यकताएं बहुत आसानी से एक App के माध्यम से दूर की जा सके।
लक्ष्यः साधुमार्गी परिवारों को सशक्त बनाना।

बड़े मेडिकल शिविरों का आयोजन

पीड़ित मानवता की मदद हेतु व गरीब, निर्धनों एवं
जरूरतमंदों को चिकित्सकीय सहायता उपलब्ध कराने हेतु प्रमुख शहरों / केन्द्रों में बड़े मेडिकल
शिविरों का आयोजन करना, जिनके माध्यम से अधिक से अधिक लोग लाभान्वित हो सकें।
लक्ष्यः- सभी क्षेत्रों में शिविर।

व्यसन मुक्ति अभियान पर विशेष आयोजन

परम पूज्य आचार्य भगवन ने हमेशा व्यसन
मुक्ति की प्रेरणा दी है। हमारा वर्तमान व आने वाली पीढ़ियां पूर्ण रूप से व्यसन मुक्त हो इस हेतु
विभिन्न आयोजन करना व समाज को व्यसन मुक्ति की प्रेरणा प्रदान करना।
लक्ष्यः- सभी क्षेत्रों/ संघों में आयोजन।

अन्नदानम् / रक्त दानम् आदि कार्यक्रम चलाना

प्रमुख साधुमार्गी तिथियों पर अन्नदानम्/
रक्तदानम्/ जीवदयानम् / श्रमदानम् के राष्ट्रव्यापी कार्यक्रम चलाना, जिसके माध्यम से
जरूरतमंदों को सहायता प्रदान की जा सके।

लक्ष्यः- सभी क्षेत्रों/ संघों में आयोजन।

कहीं भी सेवाएं दे सके ऐसे विहार सेवकों को प्रशिक्षण देना

संयमी चारित्र आत्माओं के साथ चलने वाला भैया यानी विहार सेवक अपनी अद्वितीय सेवाएं प्रदान करते हैं। ऐसे विहार सेवक भाईयों को विशेष प्रशिक्षण देकर उन्हें संत-सतियों की सेवा हेतु भेजना।
लक्ष्यः विशिष्ट विहार सेवक भाई तैयार करना।

चिकित्सा सेवाएं दे रहे चिकित्सकों का सम्मान

पूरे राष्ट्र के विभिन्न स्थानीय संघों में वर्ष भर
अपनी चिकित्सकीय सेवाएं दे रहे चिकित्सकों का स्थानीय संघों में एकरूपता के साथ सम्मान
करना।
लक्ष्यः प्रत्येक संघ

स्थायी सामाजिक सेवा प्रकल्प

-( अंतर्मव श्री संघ )
– मिल्कियत श्री संघ
– मैनेजमेंट- दानदाता- श्री संघ पदाधिकारी के साथ

गुदड़ी के लाल

हम सब अनन्त शक्ति संपन्न हैं। हमारे अंदर बहुत बड़े-बड़े काम करने की क्षमता है। आज आवश्यकता है कि हम हमारी क्षमताओं को पहचानें व उन्हें जागृत करते हुए कार्यों को अंजाम दें।
साधुमार्गी संघ में प्रतिभाओं का भंडार है। हर युवा/ युवती/ श्रावक/ श्राविका में अपार संभावनाएं , प्रतिभाएं विद्यमान हैं, आवश्यकता है , उन्हें बाहर लाने की ।

 साधुमार्गी संघ ‘ गुदड़ी के लाल ’ प्रोजेक्ट के तहत ऐसे ही गुदड़ी के लालों को , छिपी हुई प्रतिभाओं को खोजकर निकालेगा व उन्हें विभिन्न स्तरों पर परखने के बाद , विभिन्न ट्रेनरों  के माध्यम से चयनित प्रतिभाओं को तराशने, निखारने का कार्य करेगा। उनके व्यक्तित्व को निखारते हुए उनके अन्दर विद्यमान विशेष प्रतिभा को और विशेषता  देते हुए  उन्हें जीवन में आगे बढ़ाएगा व उन्हें संघ से जोड़कर संघ विकास हेतु  उन्हें  अच्छा मंच उपलब्ध करवाया जाएगा।